निराशा! पतित हंस स्त्री का यही भाग्य है। अत्यंत भावुक, वासना का अपरिहार्य आक्रमण! शक्तिशाली धर्म यातनाएँ ज्ञान द्वारा समर्थित अभिमान को पूरी तरह से नष्ट कर देती हैं। ●नरक का अपमान। उसका अटूट आत्म-सम्मान और दबंग रवैया भी उसकी कामुक द्रव्यों के साथ बह जाता है। उसका कसकर बंद शरीर और मन चरम सीमा तक मज़बूत होते जा रहे हैं, जिससे उसका लालची स्वभाव उजागर होता है।
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कोड:
dddr-001
रिलीज़ की तारीख:
2008-11-03
अवधि:
02:03:43
अभिनेत्रियां:
नात्सुकी इजिमा
प्रकार:
एकल कार्य
,
बंधन
,
समूह सेक्स
,
पतली ग्रिड